Culpa tempor cupida

Culpa tempor cupida

28 Oct, 1971

कायस्थ कार्ड (के-कार्ड) क्यों जरूरी है?
कायस्थ समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए के-कार्ड होना आवश्यक है। यह सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि समाज के उत्थान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। नीचे दिए गए बिंदुओं से इसके महत्व को समझें:

  1. विश्वस्तरीय जनसंख्या का डेटा:
    यह कायस्थों की पूरी जनसंख्या का आंकड़ा प्रदान करेगा, जो वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति को जानने में मदद करेगा।

  2. कायस्थ एकता:
    यह कार्ड दुनिया भर के कायस्थों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  3. कायस्थों की मुहिम में सफलता:
    कायस्थ समाज के एकजुट होने से उनकी विभिन्न समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा और यह मुहिम सफल होगी।

  4. विकास की दिशा:
    यह कार्ड कायस्थों के लिए विकास के रोड मैप को तैयार करने में मदद करेगा।

  5. समस्याओं का समाधान:
    कायस्थों की समस्याओं के समाधान में यह कार्ड अहम भूमिका निभाएगा।

  6. समाज का उत्थान:
    कायस्थों के हर क्षेत्र में उन्नति के लिए यह कार्ड एक महत्वपूर्ण साधन बनेगा।

  7. ग्रुप बीमा का लाभ:
    भविष्य में कायस्थों को समूह बीमा के लाभ भी मिलेंगे, जिससे उनका सुरक्षा कवच मजबूत होगा।

  8. कानूनी मदद:
    कायस्थों की कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए यह कार्ड सहायक साबित होगा।

  9. चिकित्सा सहायता:
    मेडिकल समस्याओं के समाधान के लिए यह कार्ड सहायक होगा, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

  10. ब्लड डोनेशन नेटवर्क:
    ब्लड की आवश्यकता पड़ने पर, कायस्थ ब्लड डोनर नेटवर्क के माध्यम से आपसी सहयोग से ब्लड की त्वरित व्यवस्था की जा सकेगी।

  11. तीर्थाटन पर लाभ:
    के-कार्ड होल्डर को तीर्थ स्थलों पर ठहरने और भोजन की व्यवस्था में विशेष लाभ मिलेगा।

  12. व्यापारिक छूट:
    व्यापारिक प्रतिष्ठानों से विभिन्न छूट और लाभ प्राप्त होंगे।

  13. कायस्थ होने की पहचान:
    यह कार्ड कायस्थ होने की स्पष्ट पहचान बनेगा और समाज में सम्मान बढ़ेगा।

  14. आर्थिक सेवाओं का लाभ:
    ज्यादा संख्या में के-कार्ड होल्डर्स होने पर कायस्थों को अपनी बैंकिंग व्यवस्था मिलेगी, जिसके जरिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड, लोन आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।

  15. जीवन में सफलता और सुख:
    यह कार्ड कायस्थों के जीवन को बेहतर और खुशहाल बनाने के लिए एक संकल्प के रूप में कार्य करेगा।

आपका योगदान क्या होगा?
स्वयं भी के-कार्ड होल्डर बनें और रोज़ाना पांच कायस्थों से उनके पर्सनल नंबर पर संपर्क करके उन्हें इस कार्ड के महत्व के बारे में जागरूक करें।
इस मुहिम में भागीदारी बढ़ाकर हम समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं।

कायस्थ के - कार्ड अभियान 2025

कायस्थ के - कार्ड अभियान 2025

28 Oct, 1971

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने कायस्थ परिवारों के लिए शुरू किया के - कार्ड अभियान

 "अब हर दिन एक कायस्थ, एक कायस्थ को जोड़ेगा"

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने के - कार्ड अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य समाज में एकजुटता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना है। इस अभियान का नारा है "अब हर दिन एक कायस्थ, एक कायस्थ को जोड़ेगा", जो समुदाय के भीतर संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महासभा ने इस अभियान को "एक नए युग की शुरुआत..." के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ हर हाथ दूसरे हाथ को थामेगा और एकजुटता की ताकत से समाज को सशक्त बनाया जाएगा।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष वेद आशीष श्रीवास्तव ने इस अभियान के बारे में बताते हुए कहा, "यह अभियान केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। अब हर दिन एक कायस्थ दूसरे कायस्थ को जोड़कर समाज में सामूहिक शक्ति का निर्माण करेगा। हम सभी एक परिवार हैं, और एकजुट होकर हम अपनी समस्याओं का हल निकाल सकते हैं और सामूहिक रूप से समाज की दिशा को नया रूप दे सकते हैं।"

 "हम सब मिलकर एक परिवार हैं। जब हम एक साथ होते हैं, तो हममें अद्भुत ताकत होती है।"

यह अभियान विश्वभर में कायस्थ परिवारों  के बीच एकता और सामूहिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जाएगा। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का मानना है कि जब लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो समाज में असली बदलाव आता है। यही कारण है कि उन्होंने इस पहल को "एक नए युग की शुरुआत" बताया है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनका मुख्य उद्देश्य लोगों को एक दूसरे से जोड़ना और सामूहिक सशक्तिकरण की दिशा में काम करना है।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप श्रीवास्तव आईआरएस ने इस बारे में कहा, "जब हम एकजुट होते हैं, तो हम अपनी ताकत को सही दिशा में लगाकर किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। इस अभियान से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हर कायस्थ को एक दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए, ताकि हम समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें और हमारी एकता और समृद्धि की दिशा में काम कर सकें।"

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष वेद आशीष श्रीवास्तव ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया गया है, ताकि हम सभी एकजुट होकर अपने समाज को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकें। महासभा का मानना है कि अगर हम एक दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ेंगे, तो हम न केवल अपने समुदाय को मजबूत करेंगे, बल्कि पूरे समाज में एकता और प्रेम का माहौल भी बना सकेंगे।

कायस्थ समुदाय के लोग इस अभियान के माध्यम से अपने समाज के उत्थान और समाज के भीतर एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने के लिए एक साथ खड़े होंगे।

इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ जुड़ना नहीं, बल्कि मिलकर समाज के विकास के लिए सकारात्मक कदम उठाना है। "अब हर दिन एक कायस्थ, एक कायस्थ को जोड़ेगा", यही इस अभियान का मूल मंत्र है और महासभा का लक्ष्य है कि यह पहल सम्पूर्ण कायस्थ समाज को एकजुट करने के साथ-साथ पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्त्रोत बने।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने कायस्थ परिवारों के लिए शुरू किया के - कार्ड अभियान

2 weeks ago

कायस्थ कार्ड (के-कार्ड) क्यों जरूरी है?
कायस्थ समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए के-कार्ड होना आवश्यक है। यह सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि समाज के उत्थान और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। नीचे दिए गए बिंदुओं से इसके महत्व को समझें:

  1. विश्वस्तरीय जनसंख्या का डेटा:
    यह कायस्थों की पूरी जनसंख्या का आंकड़ा प्रदान करेगा, जो वैश्विक स्तर पर हमारी स्थिति को जानने में मदद करेगा।

  2. कायस्थ एकता:
    यह कार्ड दुनिया भर के कायस्थों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  3. कायस्थों की मुहिम में सफलता:
    कायस्थ समाज के एकजुट होने से उनकी विभिन्न समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा और यह मुहिम सफल होगी।

  4. विकास की दिशा:
    यह कार्ड कायस्थों के लिए विकास के रोड मैप को तैयार करने में मदद करेगा।

  5. समस्याओं का समाधान:
    कायस्थों की समस्याओं के समाधान में यह कार्ड अहम भूमिका निभाएगा।

  6. समाज का उत्थान:
    कायस्थों के हर क्षेत्र में उन्नति के लिए यह कार्ड एक महत्वपूर्ण साधन बनेगा।

  7. ग्रुप बीमा का लाभ:
    भविष्य में कायस्थों को समूह बीमा के लाभ भी मिलेंगे, जिससे उनका सुरक्षा कवच मजबूत होगा।

  8. कानूनी मदद:
    कायस्थों की कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए यह कार्ड सहायक साबित होगा।

  9. चिकित्सा सहायता:
    मेडिकल समस्याओं के समाधान के लिए यह कार्ड सहायक होगा, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

  10. ब्लड डोनेशन नेटवर्क:
    ब्लड की आवश्यकता पड़ने पर, कायस्थ ब्लड डोनर नेटवर्क के माध्यम से आपसी सहयोग से ब्लड की त्वरित व्यवस्था की जा सकेगी।

  11. तीर्थाटन पर लाभ:
    के-कार्ड होल्डर को तीर्थ स्थलों पर ठहरने और भोजन की व्यवस्था में विशेष लाभ मिलेगा।

  12. व्यापारिक छूट:
    व्यापारिक प्रतिष्ठानों से विभिन्न छूट और लाभ प्राप्त होंगे।

  13. कायस्थ होने की पहचान:
    यह कार्ड कायस्थ होने की स्पष्ट पहचान बनेगा और समाज में सम्मान बढ़ेगा।

  14. आर्थिक सेवाओं का लाभ:
    ज्यादा संख्या में के-कार्ड होल्डर्स होने पर कायस्थों को अपनी बैंकिंग व्यवस्था मिलेगी, जिसके जरिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड, लोन आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।

  15. जीवन में सफलता और सुख:
    यह कार्ड कायस्थों के जीवन को बेहतर और खुशहाल बनाने के लिए एक संकल्प के रूप में कार्य करेगा।

आपका योगदान क्या होगा?
स्वयं भी के-कार्ड होल्डर बनें और रोज़ाना पांच कायस्थों से उनके पर्सनल नंबर पर संपर्क करके उन्हें इस कार्ड के महत्व के बारे में जागरूक करें।
इस मुहिम में भागीदारी बढ़ाकर हम समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं।

सिलसिलए यादें निशात से आज प्रस्तुत है- स्व. गोविंद आर्य "निशात" साहब की एक खूबसूरत हिंदी रचना की चंद पंक्ति

2 weeks ago

मैंने कविता को लिखा है आज यह सन्देश में 
मुझसे मिलना हो तो कल आना नए परिवेश में 

वंचना-पीड़ा-घृणा-तिस्कार-निंदा और दुख
सब ही चिर परिचित मिले हमको अंजाने देश में 

देवता तो स्वर्ग से उपहार लेके__ आए थे 
किन्तु मैंने द्वार से लौटा दिया __ आवेश में 

भूलकर भी लाँघना मत लक्ष्मण रेखा कभी
आज भी फिरते है रावण साधुओं के वेश में 

एक दिन भी सह सकी बिरहिन न साजन का बिछोह 
जल गई नव यौवना वेणी सजाकर केश में 

गोविन्द आर्य 'निशात'